नई दिल्ली: देश में गरीबी की रेखा के लिए बनाए गए टास्क फोर्स करीब एक साल तक बहस के बाद भी किसी नतीजे या पूर्णतः सहमत नहीं हो सका है. जिसपर नीति आयोग ने तय किया है कि गरीबी खत्म करने के लिए सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों की सफलता और उसकी पहुंच पर निगाह रखने तथा मदद देने हेतु देश में गरीबी की नई रेखा बनाई जाए.
वन इंडिया के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अधिकतर राज्य राजनीति के कारण सहमत नहीं हैं. लेकिन जल्द ही गरीबी की रेखा के मुद्दे पर केंद्रित विशेषज्ञों की कमेटी गठित की जाएगी. इस समिति की रूपरेखा को अंतिम स्वरूप प्रदान नहीं किया गया है लेकिन यह कमेटी जब कभी भी बनेगी, उसका कुल उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि देश में गरीब हैं कितने.
आपको बता दें कि टास्क फोर्स की ओर से गरीबी से जुड़े सामाजिक क्षेत्र के कार्यक्रमों का जायजा लेने के लिए आंकड़ों के जरिए कुछ सुझाव भी दिए हैं. इन सुझावों में यह था कि देश की कुल आबादी में निचले स्तर के 40 फीसदी लोगों को गरीब माना जाए. बता दें कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के दूसरे शासनकाल के आखिरी साल के दौरान रंगराजन कमेटी ने 29.6 फीसदी आबादी यानी करीब 36.3 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से नीचे माना था.
वहीं राज्यों का कहना है कि गरीबी के लिए जो आंकडे़ उपलब्ध कराए जाते हैं, वो सही नहीं होते. इसलिए वो सरकार की गरीबी हटाओ योजना को सफल साबित कर वाहवाही लूटने के लिए ऐसा कर रहे हैं. इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले टास्फोर्स की अधिकतर राज्य गरीबी के लिए तय किए गए न्यूनतम स्तर को मानने से मना कर दिया है.