मुसलमान होने पर गर्व महसूस करती हूँ: मलाला यूसुफ़ज़ई

संयुक्त राष्ट्र शांति दूत चुनी गयीं पाकिस्तान की मलाला यूसुफ़ज़ई ने कहा कि इस्लाम का अर्थ शांति है और उन्हें अपने मुस्लिम होने पर गर्व है। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता ने कहा कि आतंकवादियो ने उनकी हत्या करने की कोशिश की थी लेकिन वो उसमें कामयाब नहीं हो पाए और अब वे ख़ासकर लड़कियों की शिक्षा के लिए काम कर रहीं हैं। उनका कहना है की उनको उम्मीद है कि लड़के भी लैंगिक समानता पर जल्द ही काम करेंगे।

उन्होंने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि मीडिया में मुस्लिमों को ‘आतंकवादियों’ एवं ‘जिहादियों’ के तौर पर पेश किया जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘लोगों को मुझे और उन मुस्लिमों की ओर देखना चाहिए जो शांति के साथ जी रहे हैं तथा जो शांति में विश्वास करते हैं।’’ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा उन्हें ‘नायक’ की संज्ञा देते हुए आधिकारिक तौर पर विश्व निकाय शांतिदूत के रूप में शपथ दिलाए जाने के बाद मलाला ने युवाओं द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब दिए।

इससे पहले कनाडा के प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई देश की संसद को संबोधित करेंगी। मलाला को  कनाडा की मानद नागरिकता प्रदान की जाएगी।प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि 19 वर्षीय पाकिस्तानी कार्यकर्ता संसद को संबोधित करने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति होंगी। मलाला यहां 12 अप्रैल को आने वाली हैं। ट्रूडो ने कल बताया कि वह और मलाला शिक्षा के जरिए लड़कियों के सशक्तीकरण पर भी चर्चा करेंगे।

आपको बता दें कि मलाला को उस समय तालिबान के आतंकवादियों ने गोली मार दी थी जब वह स्कूल से लौट रहीं थी। उन्हें महिलाओं की शिक्षा की वकालत करने के कारण निशाना बनाया गया था। उस समय मलाला की उम्र महज 15 साल थी। मलाला का प्रारंभिक इलाज पाकिस्तान में हुआ लेकिन उसके बाद इलाज के लिए उन्हें ब्रिटेन भेजा गया। उन्हें उनके अभियान के लिए दुनियाभर से तारीफ मिली और उन्हें साल 2014 के नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया। कनाडा की मानद नागरिकता पाने वाली वह दुनिया की छह लोगों में से एक हैं।