राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार ने सरकारी स्कूलों को निजी क्षेत्र में देने का फ़ैसला किया है। इसके लिए बाकायदा “स्कूली शिक्षा में PPP नीति-2017” का मसौदा तैयार किया गया है। कैबिनेट ने इसकी मंजूरी भी दे दी है ।
पहले चरण में राज्य की 300 स्कूलों को निजी भागीदारों को सौंपा जाएगा। निजी भागीदार सरकारी स्कूलों की जमीन, इमारत और अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करेगा लेकिन उसे स्टाफ की व्यवस्था खुद करनी होगी। इन स्कूलों में लगे शिक्षकों को दूसरी सरकारी स्कूलों में समायोजित कर दिया जाएगा ।
पंचायती राज मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है कि सरकारी स्कूलों को निजी क्षेत्र में देने के बावजूद छात्रों को दी जाने वाली सुविधाओं में कोई कमी नहीं होगी । हालांकि अभी ये साफ नहीं किया गया है कि निजी भागीदार फीस बढ़ाकर अपना मुनाफा निकालेगा या उसे सब्सिडी दी जाएगी।
राठौड़ का कहना है कि स्कूली शिक्षा में PPP नीति लागू करने से सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने में सहायता मिलेगी। श्रम मंत्री जसवंत यादव का भी कहना है कि वही स्कूल निजी भागीदारी में दिए जाएंगे जहां संचालन में दिक्कतें आ रही हैं। यादव का कहना है कि इससे सरकार का खर्च घटेगा।
हालांकि वसुंधरा राजे सरकार के इस फ़ैसले पर सवाल उठने लगे हैं । विरोध के सुर खुद बीजेपी के अंदर ससे ही उठने लगे हैं । बीजेपी विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने कहा है कि ऐसे समय में जब राजस्थान में सरकारी स्कूलों के छात्रों ने मेरिट में प्राइवेट स्कूलों को पछाड़ा है, 30% एडमिशन बढ़े हैं और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर तक इसकी तारीफ कर चुके हैं। सरकारी स्कूलों को निजी क्षेत्र में देने का फैसला सही नहीं लगता है ।
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि PPP के नाम पर यह पूरी शिक्षा व्यवस्था को अपने चहेतों के हाथों सौंपने की नीति है । सरकार ने यह नहीं बताया है कि उसने किससे और किन शर्तों पर MoU किया है । पायलट के मुताबिक शिक्षा और चिकित्सा जैसी बुनियादी और संवैधानिक जिम्मेदारियों से राज्य को मुंह नहीं मोड़ना चाहिए ।
कुछ महीनों पहले ही राजे सरकार ने छात्रों की कम संख्या और कम दूरी पर ज्यादा स्कूल होने के नाम पर सरकारी स्कूलों के समायोजन की योजना लागू की थी । कांग्रेस का आरोप है कि इस योजना के तहत करीब 19 हजार छोटी स्कूलों को बंद कर दिया गया ।
सरकारी स्कूलों के अलावा राजे सरकार ने ही चिकित्सा क्षेत्र में भी सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) को लागू किया है। इसके तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHCs) निजी क्षेत्र को सौंपे जा रहे हैं। इसी तरह निजी बस ऑपरेटरों को अभी तक रोडवेज बसों के लिए आरक्षित रहे रूटों पर मान्यता देकर और रोडवेज बस अड्डों से निजी बसों के संचालन को मंजूरी देकर परिवहन क्षेत्र में भी अधिकारिक तौर पर निजी क्षेत्र की एंट्री करवाई गई है ।
वसुंधरा सरकार के इस फ़ैसले के पीछे बड़े घोटाले की आशंका जताई जा रही है । गांवों और शहरों में सरकारी स्कूलों के पास करोड़ों करोड़ की जमीनें हैं । सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और रोडवेज बस अड्डों के पास भी कुल मिलाकर करोड़ों-अरबों की संपत्तियां हैं । विपक्ष का आरोप है कि इसी संपत्ति से अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए ही इन तीनों क्षेत्रों में PPP का सहारा लिया जा रहा है ।