ख़तरे के बावजूद भारत में ही रहना चाहते हैं रोहिंग्या मुसलमान

ख़तरे के बावजूद भारत में ही रहना चाहते हैं रोहिंग्या मुसलमान

म्यांमार यानी बर्मा से प्रताड़ित होकर भारत में शरण लेने वाले रोहिंग्या मुसलमानों के सामने नया संकट खड़ा हो गया है। भारत में किसी तरह अपने अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रहे रोहिंग्या मुसलमानों को वापस बर्मा भेजने की तैयारी चल रही है।

लेकिन रोहिंग्या किसी हालत में लौटना नहीं चाहते। उनका कहना है कि भले ही उन्हें मार दिया जाए लेकिन वे वापस नहीं लौटेंगे। भारत में रोहिंग्या मुसलमान ज्यादातर हैदराबाद, जम्मू और दिल्ली में रहते है। लेकिन भारत में उनके खिलाफ लगातार दुष्प्रचार और अभियान चलाए जा रहे हैं।

भारत से रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेजे जाने की तैयारियों ने इने के सामने बेहद संकट की स्थिति खड़ी कर दी है। हैदराबाद में रहने वाले रोहिंग्या मुसलमान जफर असलम ने द मिंट को बताया कि वह यहां तीन साल से रह रहा है।

यहां वह अपेक्षाकृत खुद को सुरक्षित महसूस करता है। पुराने हैदराबाद शहर के बालापुर में रहने वाला असलम हर दिन दिहाड़ी कर 500 रुपये कमा लेता है लेकिन कई बार काम की तलाश में निकले असलम को खाली हाथ भी लौटना पड़ता है।

असलम का कहना है कि म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ भारी हिंसा की वजह से उसे पलायन करना पड़ा है और भारत में वह अपेक्षाकृत सुरक्षित महसूस करता है। लेकिन यहां से भी रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेजने की केंद्र सरकार की मुहिम ने उसे बेहद परेशान कर दिया है। 21 साल के नूर असलम का कहना है कि म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हिंसा, उन्हें मुकदमे में फंसाने और लगातार अभियानों के वजह से उसे भारत आना पड़ा। जब तक उसके पास कार्ड ( संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग – United nations high commission for refugees की ओर से दिया जाने वाला पहचान पत्र) है, तब तक वह सुरक्षित है।

दो सप्ताह पहले हैदराबाद शहर की पुलिस को केंद्र से संदेश मिला कि वह शहर में कथित तौर पर रहे रहे रोहिंग्या मुसलमानों पर नजर रखें। वे शहर की सुरक्षा-व्यवस्था के लिए खतरा बन सकते हैं। इसके बाद हैदराबाद पुलिस कमिशनरेट ने यूएनसीएचआर का कार्ड न होने पर 12 रोहिंग्या मुसलमानों को हिरासत में ले लिया।

हालांकि उनमें से कुछ ने वोटर आई कार्ड और आधार कार्ड बनाने में कामयाबी हासिल कर ली थी। लेकिन भारत में उनके खिलाफ लगातार चलाए जा रहे अभियानों की वजह से अब उनके सामने भारी मुश्किल की स्थिति आ गई है।

कहा जा रहा है कि रोहिंग्या मुसलमान अपराध और असामाजिक गतिविधियों में लिप्त हैं। जम्मू-कश्मीर  में लगातार उनके खिलाफ अभियान चलाया गया। जम्मू चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कुछ महीनों पहले उन्हे राज्य से न हटाने पर खून-खराबा तक करने की धमकी दे डाली थी।

अब केंद्र सरकार की ओर से वापस भेजे जाने की मुहिम से वे बेहद डरे हुए हैं। यूएनसीएचआर के मुताबिक भारत में 16, 500 रोहिंग्या शरणार्थी रजिस्टर्ड हैं। हालांकि कई हजार बगैर उसके कार्ड के रह रहे हैं। रोहिंग्या शरणार्थियों के बारे केंद्र के मौजूदा रुख से ऐसे मुसलमानों पर गाज गिरना तय  है।

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