सीरिया से भागने वाले सुन्नी द्वारा छोड़ी गई संपत्ति को शिया और ईसाई अल्पसंख्यक लेना शुरू किया

सीरिया से भागने वाले सुन्नी द्वारा छोड़ी गई संपत्ति को शिया और ईसाई अल्पसंख्यक लेना शुरू किया

दमिश्क  : अब तक सीरिया में करीब पाँच लाख लोग मारे गए हैं। सीरिया लाखों लोग विदेश भाग गए हैं। और अब संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी समिति’ ने गुरुवार को कहा कि दक्षिण-पश्चिमी सीरिया में हिंसा बढ़ने से 3,20,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं जबकि 7,50,000 अन्य लोगों पर हिंसा का शिकार होने का खतरा मंडरा रहा है. अधिकांश शरणार्थियों में सुन्नी अरब हैं, असद सीरिया के उत्तर और दक्षिण-पश्चिम में ज्यादातर सुन्नी विद्रोही क्षेत्रों को फिर से लेने के लिए आगे बढ़ रहे हैं, उन्हें और अधिक पुस किया जा सकता है। इस बीच, असद का राज्य अलौइट (उनके संप्रदाय) के रूप में अधिक सांप्रदायिक हो रहा है, शिया और ईसाई अल्पसंख्यक भागने वाले सुन्नी द्वारा छोड़ी गई संपत्ति को लेना शुरू कर दिये हैं।

गौरतलब है कि सिरिया के 80 फीसद सुन्नी मुसलमानों पर 10 से 20 प्रतिशत शिया मुसलमान हावी हैं यहां तक की उच्च अधिकारी ज़्यादातर शिया ही हैं. दुसरी तरफ विद्रोहियों में सुन्नियों की तादाद सबसे ज़्यादा है. असद के ख़िलाफ़ बगावत की एक वजह सुन्नी बहुसंख्य अबादी देश में शिया शासक होना है. जो विद्रोही सेना में शामिल सुन्नीयों को तुर्की, सऊदी अरब, अमरीका और यूरोपीय यूनियन समेत कई देशों से समर्थन है जबिक बशर अल-असद की शासन को ईरान का समर्थन है चुंकि ईरान शिया बहुल देश है और सिरिया में अपनी पकड़ मजबुत बनना चाहता है लेबनान में हिजबुल्लाह विद्रोही ग्रुप भी बशर अल-असद का समर्थन करता रहा है.

चुंकि हिज्बुल्लाह भी शिया लड़ाकों का ही संगठन है. ईरान, इराक़, लेबनान और सीरिया में शिया सत्ता का बोलबाला है जबिक शिया की अबादी इन देशों में कम है. वहीं सुन्नी देश क़तर, यूएई, सऊदी का गुट मध्य पूर्व में अलग है. सीरिया में शिया-सुन्नी के साथ तेल गैस के टकराव के कारण भी विद्रोह है.”

और इस प्रकार सिरियन एक और विस्थापित, हिंसक प्रावासी में बदल सकते हैं आप मान सकते हैं की फिलिस्तीनी शरणार्थी जैसे। उनके सामने अब स्थिति फिलिस्तीनियों की तरह है, वे मध्य पूर्व में एक अस्थिर उपस्थिति बन सकते हैं। सीरिया के एक पूरी पीढ़ी विस्थापित और अशिक्षित हो रही है

मध्य पूर्व और मुस्लिम देशों के संघर्षों के पुनरुत्थान को बढ़ावा देने में एक प्राचीन धार्मिक विभाजन ही है और यह तनाव खाड़ी देशों में फैलता ही जा रहा है। बढ़ते सांप्रदायिक संघर्ष ने भी पारम्परिक जिहादी नेटवर्क का पुनरुद्धार किया है जो इस क्षेत्र से परे एक खतरा बन गया है।

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