ज़कात अदा करने का सही तरीका यह है कि आप ज़कात की राशि फ़कीर व गरीबों और अन्य मिस्कीन को ज़कात को देकर उसका मालिक बना दें।
अपने माता-पिता, और अपने बच्चों को जकात देना जायज़ नहीं, उसी तरह पति पत्नी एक दूसरे को जकात नहीं दे सकते, जो लोग खुद साहबे निसब हों उन्हें जकात देना जायज़ नहीं। आँ हज़रत पैगंबर के परिवार (हाशमी सज्जनों) को जकात देने का आदेश नहीं, बल्कि अगर वह जरूरतमंद हों तो उनकी मदद ज़कात के अलावा अनिवार्य है। अपने भाई, बहन, चाचा, भतीजे, मामा, भांजे को जकात देना जायज़ है.
ज़कात निम्नलिखित बातों पर फर्ज़ है:
1- सोना जबकि साढ़े सात (7.5) तोला या उससे अधिक हो।
2- चांदी जबकि साढ़े बावन (52.5) तोला या उससे अधिक हो।
3- रुपया पैसा और माल व्यापार जबकि इसकी कीमत साढ़े बावन तोला चांदी के बराबर हो।
गौरतलब है कि अगर किसी के पास थोड़ा सोना है कुछ चांदी है, कुछ नकदी रुपये हैं, कुछ माल व्यापार है और उनकी निवल मूल्य साढ़े बावन तोला चांदी के बराबर है तो उस पर भी ज़कात अनिवार्य है, उसी तरह अगर कुछ सोना है कुछ चांदी या कुछ नकदी रुपया या कुछ चांदी कुछ माल व्यापार है, तब भी उन्हें मिलाकर देखा जाएगा कि साढ़े बावन तोला चांदी लायक बनती है या नहीं? अगर बनती है तो ज़कात अनिवार्य है अन्यथा नहीं।
सोना चांदी, नकदी, माल व्यापार में कोई एक या मिलकर उनके लायक जब चांदी के बराबर हो तो उस पर ज़कात अनिवार्य है। इस्तेमाल होने वाली कंप्यूटर, फर्नीचर और मोबाइल पर ज़कात अनिवार्य नहीं।
