हैदराबाद१3 अगस्त (सियासत न्यूज़) मर्कज़ी हुकूमत आसाम फ़सादाद मुआमला में बेजा बेहस-ओ-मुबाहिस में उलझने के बजाय फ़सादाद के मुतास्सिरीन की बाज़ आबादकारी पर तवज्जा मबज़ूल करे चूँकि 3.5 लाख मुस्लमान तक़रीबन एक माह से पनाह गज़ीन कैम्पों में ज़िंदगी गुज़ारने पर मजबूर हैं जोकि मलिक के मुफ़ाद में नहीं ही। सदर सफ़ा बैत-उल-माल मौलाना ग़ियास अहमद रशादी ने आज प्रैस कान्फ़्रैंस से ख़िताब के दौरान ये बात बताई। उन्हों ने बताया कि आसाम के मुख़्तलिफ़ राहत कारी कैम्पों में ज़ाइदाज़ 3.5 लाख मुस्लमान बे यार-ओ-मददगार इमदाद के लिए तड़प रहे हैं।
अगर वो मज़ीद उसी हालत में रहेंगे तो हिंदूस्तान का सैकूलर किरदार मुतास्सिर होने का ख़दशा ही। उन्हों ने बताया कि आसाम फ़सादाद की इत्तिला मौसूल होने के बाद 30 जुलाई को सफ़ा बैत-उल-माल की जानिब से दो रुकनी वफ़द गोहाटी पहुंचा जहां से चीराइंग और डोबरी के राहत कारी कामों का दौरा करते हुए मुतास्सिरीन में इमदाद की फ़राहमी का सिलसिला शुरू किया गया। इस वफ़द में मौलाना ग़ियास रशादी और डाक्टर मुज़म्मिल अन्ज़र मौजूद थी।
मौलाना गैस रशादी ने बताया कि सफ़ा बैत-उल-माल ने आसाम फ़सादाद के मुतास्सिरीन की बाज़ आबादकारी के लिए सफ़ा बैत-उल-माल की जानिब से 60 लाख रुपय की इमदाद पहुंचाने का निशाना मुक़र्रर किया है। उन्हों ने बतायाकि बिलासी पाड़ा में जुमला 81 राहत कारी कैंप हैं लेकिन सफ़ा बैत-उल-माल की जानिब से 34 राहत कारी कैम्पों में पहुंच कर इमदाद पहुंचाई गई।
उन्हों ने बताया कि कैम्पों में बेदीनी के माहौल को देखते हुए सफ़ा बैत-उल-माल की जानिब से मालमीन का तक़र्रुर अमल में लाया गया है ताकि उन मुतास्सिरीन में दीन हक़ की तब्लीग़-ओ-इशाअत का फ़रीज़ा अंजाम दिया जा सकी। इलावा अज़ीं मुतास्सिरीन मैं बिस्कुट, दूध के डिब्बी, बच्चों के लिए सीरीलीक, साबुन, तेल, बेडशीट्स, बलानकटस और कपड़ों की तक़सीम-ए-अमल में लाई गई ही। सफ़ा बैत-उल-माल की जानिब से ताहाल 10 लाख रुपय की इमदाद आसाम के मुतास्सिरीन में तक़सीम की जा चुकी है और मज़ीद इमदाद की तक़सीम का सिलसिला जारी है मौलाना ग़ियास रशादी के बमूजब सफ़ा बैत-उल-माल का दूसरा वफ़द मिस्टर शेख़ उबीद की निगरानी में आज चीराइंग पहुंच चुका है और चीराइंग में ये वफ़द राहत कारी कैम्पों में मुक़ीम अफ़राद-ओ-ख़ानदानों में इमदादी अशीया तक़सीम करेगा।
उन्हों ने बताया कि आसाम के फ़साद मुतास्सिरीन की बाज़ आबादकारी केलिए सफ़ा बैत-उल-माल की शाख़ पर भी 15 लाख रुपय जमा किए हैं जबकि नांदेड़ की शाख़ में 5 लाख रुपय वसूल हुए हैं। उन्हों ने बताया कि सफ़ा बैत-उल-माल माह रमज़ान के बाद मुतास्सिरीन की बाज़ आबादकारी और उन्हें ज़रूरी घरेलू सामान की फ़राहमी का भी मंसूबा तैय्यार कर चुका है।
उन्हों ने बताया कि आसाम के नवाही इलाक़ों में मौजूद रफ़ाही कैम्पों तक किसी की इमदाद नहीं पहुंच रही है और हुकूमत राहत कारी कैम्पों में इमदाद के नाम पर नाक़िस चावल और दाल के इलावा महिदूद अदवियात की फ़राहमी पर इकतिफ़ा कर रही है। कैम्पों की सूरत-ए-हाल का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि हर कैंप में औसतन 2 ता ढाई हज़ार नफ़ूस क़ियाम किए हुए हैं जिन में बूढ़ी, जवान, मर्द, ख़वातीन और बच्चे शामिल हैं।