अंग्रेज़ीदाँ शायर

* उर्दू के एक मारूफ़ शायर को गुफ़्तगु के दौरान अपने हर जुमले में अंग्रेज़ी का कोई नया लफ़्ज़ टाँकने की आदत थी।
वो जब भी अंग्रेज़ी का कोई नया लफ़्ज़ सुनते तो अपने किसी साथी से उसके मानी पूछ लेते।

एक औरत का खत

गाँव में एक औरत रहा करती थी। उसका शौहर शहर में काम करता था। वह अपने शौहर को खत लिखना चाहती थी, लेकिन कम पढ़ी लिखी होने की वज्ह से उसे यह पता नहीं था कि Full Stop कहाँ लगेगा; इसीलिए उसका जहाँ मन करता था, वहीं Full Stop लगा देती थी।

अहमक़ ?

दो बेवक़ूफ टहलते टहलते एक दरिया के पोल पर जा निकले वहां उन्हों ने एक ख़ूबसूरत लड़की को आँसू बहाते और बड़बड़ाते हुए देखा वो कह रही थी : मेरा महबूब मेरा दिलबर हर इतवार को इस जगह आकर मुलाक़ात करता है, लेकिन आज वो नहीं आया। लगता है कि वो मुझ स

तख़ल्लुस

एक महफ़िल में कुछ शायर बेख़ुद देहलवी और साइल देहलवी का ज़िक्र कर रहे थे।
एक शायर ने शेर सुनाए जिस में दोनों के तख़ल्लुस नज़्म हुए थे। वहां हैदर देहलवी भी मौजूद थे। शेर सुनकर कहने लगे।

मुस्कुराना मना है

मैं समझा !……..
लड़के ने कसाई से सवाल क्या : ये बकरा क्यों चीख रहा है ?

कसाई बोला : इसे ज़ब्ह करने के लिए ले जा रहा हूँ।

लड़के ने कहा : ओह ! मैं समझा तुम उसे स्कूल ले जा रहे हो !
—————-
वर्ना………..!

तानपूरे और तंबूरे का फर्क़

पतरस बुख़ारी रेडियो स्टेशन के डायरेक्टर थे एक मर्तबा मौलाना ज़फ़र अली ख़ानसाहब को तक़रीर के लिए बुलाया तक़रीर की रिकार्डिंग के बाद मौलाना पतरस के दफ़्तर में आकर बैठ गए।

तंग आचुकी थी !

तंग आचुकी थी !
* एक मरीज़ा की टांग की हड्डी टूट गई डाक्टर ने प्लास्टर के बाद छुट्टी कर उसे हिदायत की कि सीढियों से उतरना चढ़ना नहीं है ।

पुरानी बीमारी !

पुरानी बीमारी !
डॉक्टर ने मरीज़ का मुआइना करने के बाद : ये कोई पुरानी बीमारी है जो आप की सेहत और ज़हनी सुकून को तबाह-ओ-बर्बाद कर रही है ।
ये सुनकर मरीज़ ने डाक्टर से कहा डाक्टर साहिब आहिस्ता बोलिए वो बीमारी बाहर ही बैठी है !
———————

क्या करते हैं?

* एक दफ़ा एक मशहूर शायर किसी होटल में खाना खाने के लिए जा रहे थे। रास्ते में एक दोस्त मिल गए। उन्हें भी साथ ले लिया।
होटल पहुंचकर शायर साहिब ने पूछा : क्या खाओगे?

ज़रा मुस्कुराइए

दुनिया बड़ी धोकेबाज़ !

कोई चोर मकान में दाख़िल हुआ तो उसने तिजोरी पर लिखा हुआ देखा
‘दाइं तरफ़ लगे हुए बटन को दबाएं तो तिजोरी ख़ुदबख़ुद खुल जाएगी।’
चोर ने इस हिदायत पर अमल किया और बटन पर हाथ रखा ही था कि सायरन बज पड़ा और चोर पकड़ा गया।

तोतों का बॉस

एक कम्प्यूटर इंजीनियर तोता खरीदने गया।

दुकानदार ने उसे तीन तोते दिखाए। कहा सबसे आखरी तोते की कीमत 500 रुपए है। यह कम्प्यूटर चलाना जानता है।

उसके बगल में दूसरे तोते की कीमत एक हजार रुपए है। यह सारे ऑपरेटिंग सिस्टम चला सकता है।

नुसरत फ़तह अली ख़ान… तुम बहुत याद आते हो

16 अगस्त 1997 को महज़ 48 बरस की उम्र में इंतिक़ाल कर जाने वाले और फ़न-ए-क़व्वाली और क्लासिकी मूसीक़ी को नई जिहतों से मुतआरिफ़ करवाने वाले उस्ताद नुसरत फ़तह अली ख़ान की यादें आज भी उन के चाहने वालों के दिलों में ज़िंदा हैं।

ईद उल फ़ितर.. नज़ीर अकबराबादी की जुबान में

है आबिदों को त‘अत-ओ-तजरीद की ख़ुशी
और ज़ाहिदों को जुहाद की तमहीद की ख़ुशी
रिन्द आशिकों को है कई उम्मीद की ख़ुशी
कुछ दिलबरों के वल की कुछ दीद की ख़ुशी

ऐसी न शब-ए-बरात न बक़रीद की ख़ुशी
जैसी हर एक दिल में है इस ईद की ख़ुशी

शीशा व‌ तीशा

असरी तरक़्क़ी !
मालकिन ने नौकरानी को डाँटते हुए कहा : तुम तीन दिन से काम पे नहीं आई, और बताया भी नहीं?
नौकरानी : बाजी मैंने तो फेसबुक पर इस्टेट्स अपडेट कर दिया था कि
आई ऐम गोइंग टू गावं फ़ार थ्री डेज़
साहिब जी ने इस पर कमेन्ट भी किया था

कुत्ते

पतरस बुख़ारी
इलम अलहिवा नात के प्रोफेसरों से पूछा। सल्लू तिरियों से दरयाफ़त किया। ख़ुद सर खपाते रहे। लेकिन कभी समझ में ना आया कि आख़िर कुत्तों का फ़ायदा किया है?

उर्दू क्या है? एक कोठे की तवायफ है !

खुशवंत सिंह – उर्दू का मुक़द्दर दो पड़ोसी मुल्कों में एक के बाद एक, दो दिनों में तै किया गया. 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान में, जब इस ने ख़ुद को एक ख़ुदमुख़तार, आज़ाद मुस्लिम जमहूरीया क़रार दे दिया.

बेकारी……. ……शौकत थानवी

बेकारी यानी बेरोज़गारी इस एतबार से तो निहायत लाजवाब चीज़ है कि हर छोटी से छोटी हैसियत का इंसान अपने घर में तमाम दुनिया से बेनयाज़ हो कर इस तरह रहता है कि एक शहनशाहे हफ़त अक़लीम(सारी दुनिया) को अपने महल में वो फ़ारिगुलबाली नसीब नहीं हो सकत

कुछ ग़लत-उल-आम अलफ़ाज़ के बारे में

(साबिर अली सिवानी)… दुनिया की किसी भी ज़ुबान पर क़ुदरत हासिल करना निहायत मुश्किल अमर होता है। अगर कोई शख़्स ये दावा करता है कि उसे मुख़्तलिफ ज़ुबानों पर उबूर हासिल है, तो वो कहीं ना कहीं मुबालग़े से काम लेता है।

जूता-

निदा फ़ाज़ली…….. जूता इंसान और ज़मीनी रिश्ते के बदलते दौर की तारीख़ का बयानिया है। सर्दी से बचने के लिए रूई , ऊन और जानवरों की खालें वजूद में आईं।

न्यूज़िलैंड में बैनुल अ़कवामी मुशायरा

उर्दू हिन्दी असोसिएशन न्यूज़िलैंड की जानिब से बैनुल अ़कवामी (अंतर्राष्ट्रीय) मुशायरा कवि सम्मेलन हुआ। इस त़करीब में साज़ पर ग़ज़लें भी पेश की गयीं।